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हिंदी राज्यों के लिए मार्गदर्शक है पश्चिम बंगाल का हिंदी मेला

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हिंदी मेला में निराला, महादेवी, पंत और प्रसाद की कविताओं के गायन से रवींद्र संगीत की तरह छायावादी संगीत की शुरुआत हुई। पटना से आये ‘हिरावल’ की टीम ने त्रिलोचन,शमशेर,मुक्तिबोध,गोरख पांडेय आदि की कविताओं की भी नए प्रयोग के साथ प्रस्तुति दी। बनारस से आई प्रशस्ति तिवारी ने कबीर के दोहों और पदों की संगीतात्मक धुन पर कथक प्रस्तुत कर श्रोताओं का हृदय जीत लिया। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित हिंदी मेला का यह चौथा दिन था। हिंदी मेला में ढाई सौ से अधिक युवाओं विद्यार्थियों ने काव्य संगीत, लोकगीत और भावनृत्य प्रस्तुत किया। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कवि मंगलेश डबराल की आज के दिन विशेष उपस्थिति थी। उन्होंने कहा कि हिंदी मेला का यह सफर अभूतपूर्व है। हिंदी प्रदेशों के लिए यह मार्गदर्शक है। धर्म और जाति से ऊपर उठकर मानवीय भूमि पर ऐसा मेला हर हिंदी शहर में होना चाहिए,जो सभी को जोड़े। उन्होंने अपनी एक कविता भी सुनाई।
आज काव्य संगीत, लोकगीत और भावनृत्य प्रतियोगिता में निर्णायक तौर पर उपस्थित थे- श्रीमती रश्मि पांडे, प्रतिभा सिंह,अर्धेन्दु चक्रवर्ती और चंद्रिमा मंडल जी। आज के कार्यक्रम का सफल संचालन पंकज सिंह, सुमन शर्मा, रूपेश कुमार यादव, पूजा दुबे और धनंजय प्रसाद ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन महासचिव राजेश मिश्रा ने किया।
काव्य संगीत का शिखर सम्मान रंंकिनी सेनगुप्ता, द बी एस एस स्कूल, प्रथम विशेष आयुष पांडे, ऑक्सफोर्ड स्कूल, द्वितीय इशिता भट्टाचार्य, खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज, चतुर्थ नवीन मिश्र, कमला शिक्षा सदन,पंचम शिवांगी कुमारी, हरप्रसाद प्राइमरी, रूपांजलि कु सिंह, हमारा प्रयास, सृजनी सेनगुप्ता और देवारून राय डगलस मेमोरियल, सौरव मिश्र, कांचरापाडा स्कूल, खुशी मिश्र, सोहनलाल देवरालिया,मधु सिंह विद्यासागर विश्वविद्यालय, अदिति दुबे, हावड़ा नवज्योति ,राजेश सिंह कलकत्ता विश्वविद्यालय, सूर्यदेव राय को मिला।

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