West Bengal

” देश के आधे से भी ज्यादा जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधान मंत्री जी से जीएसटी के नए संस्करण का अनुरोध : फैम” द्रुतगामी समाचार

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सरकार ने भी करदाताओं की कठिनाइयों को संज्ञान में लेते हुए ,विगत 42 माह में वर्तमान जीएसटी में 1000 के लगभग बदलाव किए है पर कर चोरी एवं फ़र्ज़ी इनपुट टैक्स क्रेडिट की घटनाएं भी अपने चरम सीमा पर है और दिन प्रतिदिन विभाग इस प्रकार के फ़र्ज़ीकरण की रोकथाम में लगा हुआ है। इस फ़र्ज़ीकरण के चलते ईमानदार व्यापारी दण्डित हो रहे है क्योंकि व्यापारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट तब तक नहीं मिलता है ,जब तक विक्रेता व्यापारी अपनी विवरणी दाखिल न कर दे अन्यथा उसकी गलती की सजा उस ईमानदार व्यापारी को मिलेगी जो विक्रेता व्यापारी को अपना पूरा जीएसटी भुगतान कर चुका है।
श्री जयेन्द्र तन्ना ,राष्ट्रीय अध्यक्ष ,फैम ने कहा कि बैंक में फ्रॉड होना कोई आश्चर्य का विषय नहीं है पर उस फ्रॉड की रकम बैंक अपनी जमाकर्ताओं से नहीं वसूलता है ,जबकि वर्तमान जीएसटी में किसी अन्य व्यक्ति द्वारा की गयी कर में धोखाधड़ी की सजा एक ईमानदार व्यापारी को भुगतनी पड़ती है। वर्तमान जीएसटी में व्यापारी द्वारा की गयी अनजाने मानवीय त्रुटि पर सुधार का अवसर देने के स्थान पर सीधा सीधा दंड एवं पंजीकरण रद्द करने के प्रावधान हैं। कम्पनीज एक्ट में छोटी कंपनियों पर बड़ी कंपनियों के मुकाबले कम एवं सरल अनुपालन है ,इसके ठीक विपरीत जीएसटी में संसाधन से सुसज्जित बड़े उद्योग पतियों में एवं संसाधन रहित छोटे व्यापारी को एक समान अनुपालन करना पड़ता है ,जबकि दोनों की क्षमता एवं इंफ्रास्ट्रक्चर भिन्न भिन्न है।
श्री वी के बंसल , राष्ट्रीय महामंत्री फैम के अनुसार अब यह अति आवश्यक हो गया है कि विगत 42 माह के अनुभव के आधार पर जीएसटी के सभी कानूनों का पुनर्मूल्यांकन कर , संरचनात्मक परिवर्तन कर के जीएसटी का नया संस्करण (version) पुनः लिखा जाए और यही मांग हम इस अनुरोध पत्र के माध्यम से आपसे कर रहे है। श्री बंसल ने कहा कि जीएसटी का नया संस्करण इस प्रकार लिखा जाए जो की कर चोरी रोकने हेतु सक्षम हो, सरकार को ज्यादा राजस्व प्राप्त हो एवं व्यापारी वर्ग शुष्म अनुपालन से अपना कर दायित्व का निर्वाह करने के लिए प्रोत्साहित हो।
श्री सीअच् कृष्णा , चेयरमैन एडवाइजरी कमिटी फैम के अनुसार जीएसटी का नया संस्करण विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए इस प्रकार लिखा जाए कि निवेशकों को यह विश्वास हो जाए कि भारत में कर कानूनों में स्थिरता आएगी और आगामी 5-10.वर्षो तक जीएसटी कानून में कोई मूलभूत परिवर्तन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
श्री बंसल ने जोर देते हुए कहा कि जीएसटी के नये संस्करण लिखने की प्रक्रिया में उद्योग संगठनो के साथ साथ खुदरा व्यापारियों के संगठन की भी भागीदारी हो और एक इतनी प्रगतिशील कर प्रणाली का निर्माण हो कि आपके नेतृत्व में राष्ट्र के विकास की इस राह में राष्ट्र का लघु व्यापारी भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सके एवं एक सरल सहज कर प्रणाली से राष्ट्र निर्माण में अपने कर दायित्व का पूर्ण ईमानदारी से निर्वाहकर सके। फैम द्वारा एक ऐसा प्रेजेंटेशन तैयार किया गया है जिसमे कर चोरी पर रोकथाम लगेगी, सरकार को अधिकतम राजस्व प्राप्त होगा और छोटे व्यापारियों को जीएसटी के अनुपालन में भी कोई भी कठिनाई नहीं होगी।

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